वसंत पचंमी
पंचांग यानी कैलेंडर कहें तो उसका एक मंथ है,माघ जैसे जनुअरी - february वैसे ही. तो सबको अरेंज कर फिर से बात करते हैं की, हिन्दू पंचांग के माघ महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी डेट को वसंत पचंमी का पर्व मनाया जाता है। ध्यान देना की ये डेट जो हम केलिन्डर यूज़ करते हैं उससे अलग होती है, इसलिए आपकी बार ये २६ जनुअरी को ही पड़ गयी कभी ये 4 फेबुरारी को यानी की लास्ट ऑफ़ जनुअरी से एंड ऑफ़ february के बीच में त्यौहार मनाया जाता है.
क्या करते है इस त्यौहार में? ज्यादा हाई लाइट क्यूँ नहीं होता है ?
एक लाइन में कहे तो ये स्टूडेंट का फेस्टिवल है टू प्रे एंड गेट द ब्लेस्सिंग ऑफ़ गॉडेस सरस्वती. तो मुख्य रूप से ये पर्व ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।
बसंत पंचमी की कथा
सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, पर परफेक्शन नहीं लग रहा था ।
तब उन्होंने किन्होने ब्रह्मा जी ने , बिलकुल सही. विष्णु जी से धरती को अपडेट करने के लिए परमिशन मांगी, और एप्प्रूव होते ही अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छिड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई ।
जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था । वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी । जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा ।
सरस्वती देवी को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है । संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं ।
बसंत पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं ।
पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि, बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी । इस कारण बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है ।
माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी से ऋतुओं के राजा बसंत का आरंभ हो जाता है । यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है । इसीलिए इसे ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रथम दिन माना जाता है ।
श्री सरस्वतीदेवी, क्या मतलब इसका ?
मानव के विकास का प्राचीन भारतीय सिद्धांत जो लम्बी थ्योरी के साथ वेद-पुराण में है, आधुनिक थ्योरी अलग है. इसमें यानी वेद पुराण मानव का विकास देवता के अंश से माना जाता. आधुनिक थ्योरी नॉन लिविंग से लिविंग के विकास की बात करती है. सनातन बात करती है हमारे धरती से नहीं देवों से हमारा कनेक्शन है ब्रहमा ने हमें जन्म दिया है. और जिस भाषा में देव बोलते थे वो संस्कृत मानी जाती है. इसी संस्कृत में ‘सरसः अवती’, शब्द होता है जिसका मतलब एक गतिमें ज्ञान देनेवाली अर्थात् गतिमति । इनएक्टिव ब्रह्माका एक्टिव रूप है।
श्री सरस्वतीदेवीको ब्रह्माकी शक्ति क्यों मानते हैं ?
महासरस्वतीदेवी एवं श्री सरस्वतीदेवीने क्रमशः निर्गुण एवं सगुण, दोनों स्तरोंपर ब्रह्माकी शक्ति बनकर ब्रह्मांडकी निर्मितिमें ब्रह्मदेवका सहयोग किया । श्री सरस्वतीदेवी अर्थात् ब्रह्माकी निर्गुण अथवा सगुण स्तरपर कार्यरत शक्ति । ‘ब्रह्माकी शक्ति उससे एकरूप ही होती है । आवश्यकतानुसार वह कार्यरत होती है ।’ मानव इस बातको समझ पाए, इसलिए कहते हैं, ‘श्री सरस्वतीदेवी ब्रह्माकी शक्ति हैं ।’
(साभार : सनातन संस्थाद्वारा प्रकाशित लघुग्रंथ ‘श्रीसरस्वती’)
