इमेज में दिख रहे व्यक्ति को देख रहें ना!, जी! लुंगी और गमछा में जो व्यक्ति दिख रहे हैं उनका नाम पतायत साहू है। पतायत जी को इस बार पद्मश्री पुरस्कार मिला है। पतायत जी ओडिशा के कालाहांडी जिले के रहने वाले हैं। गांव का नाम नान्दोल है।
कैसे मिला पद्मश्री ?
इक गाना था "मुंग्या, मै गुड की डली" Movie इनकार, 1977 में रिलीज़ हुई ये गाना फेमस सन 2000 में हुआ| राजेश रौशन का संगीत और मजरुह सुलतान पूरी के बोल. जब रिलीज़ हुआ उस वक्त नहीं बल्कि 20 साल के बाद फेमस हुआ ! बीट्स अच्छे थे पर हिट होने में समय लगा |
अपने पतायत जी भी कर्म में लगे रहे और छोटी मोटी ख्याति-नाम -पैसा को अवॉयड करते हुए. `बस मेडिसिनल प्लांट कलेक्ट करते रहे अपने घर के पीछे 1.5 एकर के ज़मीन में, आज इनक कलेक्शन में 3000 से भी ज्यादा औषधीय पौधे हैं। यह कार्य वो पिछले 40 साल से कर रहे हैं।
पतायत जी केमिकल फ्री खेती पर जोर देते हैं। यूरिया-डाया- कीटनाशक केमिकल के विरोधी अपने पौधों में कभी भी रासायनिक उर्वरक का प्रयोग नहीं करते हैं।
पतायत जी खेती करते हैं और वैद्य भी हैं. इलाज के लिए पैसे की मांग नहीं करते हैं। पतायत जी के खेत में जो 3000 पौधे हैं। उसमें से 500 तो वो भारत के अलग अलग जगह से संग्रह किये हैं बाकी सब कालाहांडी के जंगल से संग्रह किये हैं। उनके बगीचे में कई ऐसे औषधीय पौधे हैं जो किस और जगह नहीं मिलती है। पतायत जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
और अन्त में एक बात जरूर कहूंगा कि आप लोग राष्ट्रीय प्रचार, संचार माध्यमों में कभी भी पतायत जी के बारे में नहीं सुने होंगे और ना ही उनके औषधीय पौधों के बारे में। ऐसी तमाम जीवन उपयोगी खबरों के लिए यही आये