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स्थान: जिला अस्पताल बाराबंकी
घटना : इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों और कर्मचारियों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है।
इमरजेंसी वार्ड में बेड होने के बावजूद मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जाता है। रविवार को तीमारदारों ने इसका विरोध किया तो तीमारदारों और चिकित्सकों में विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह से मामले को शांत कराया। आरोप है कि यहां चिकित्सकों और कर्मियों की मनमानी की वजह से आए दिन विवाद होते रहते हैं।
रविवार को लखपेड़ाबाग निवासी देव कुमार पिता रामचंद्र की हालत बिगड़ने पर उपचार के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। आरोप है कि यहां मौजूद चिकित्सकों ने सीधे मुंह बात नहीं की और बिना देखे ही स्ट्रेचर पर लिटाकर ग्लूकोज की बोतल लगा दी। काफी देर बाद भी जब आराम नहीं मिला तो देव कुमार ने मौके पर मौजूद चिकित्सक से देखने को कहा, लेकिन वह नहीं उठे। इस पर डॉक्टर और तीमारदार के बीच विवाद होने लगा।
मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भी इस बात का विरोध करते हुए कहा कि इमरजेंसी में बेड होने के बाद भी मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जाता है। विवाद बढ़ता देख मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह से मामले को शांत कराया। इस बाबत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा का कहना है कि मामला जानकारी में नहीं है। फिर भी जांच कराई जाएगी।
