ये खबर जुडी है भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के बटवारे वाली सिन्धु नदी संधि या सिन्धु जल समझौता से .
मामला कुछ यूँ है की, २५ JANUARY २०२३ को भारत सरकार ने सिन्धु जल समझौता में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी कर दिया.
खबर है की भारत ने पाकिस्तान से संधि का भौतिक उल्लंघन सुधारने के लिए 90 दिनों के भीतर एक सरकारी मीटिंग में भाग लेने के लिए कहा है.
19 सितंबर 1960 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. पूरे 9 साल तक चली बातचीत के बाद. तो ये जलसंधि भारत और पाकिस्तान के बीच और उसकी सहायक नदियों के पानी का बंटवारा करती है.
9 साल तक चली लम्बी बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को को हुई थी . तय हुआ की पूर्वी नदियों जिसमें व्यास और रावि नदी आती है के पानी का पूरा उपयोग भारत करने को आजाद है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी पाकिस्तान को देना होगा.
समझौता तय मुद्दों पर चला. दिक्कत कुछेक 20 साल पहले शुरु हुई. जहाँ एक तरफ भारत में बिजली की खपत बढ़ी है तो हमने देश भर नदियों पर कई हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण की शुरुआत की योजना बनाई
सिन्धु नदी और उसकी दीगर सहायक नदियाँ, बटवारे में आती है इसलिए पकिस्तान को तो इन्फॉर्म करना ही पडेगा. वहीं पाकिस्तान बिना सोचे समझे की इससे उसे क्या फायदा होगा, अडंगा लगाए हुए है. मसला हल करने की बजाय 20 साल से प्लान इस प्रोजेक्ट को यूँ ही ठन्डे बसते की गर्त में तहाये बैठा है. तो दशकों पुराने इस ऑब्जेक्शन विवाद नहीं को रेसोल्वे करने के लेकर भारत ने बैठक बुलाई है. पकिस्तान के साथ.

