शेरों-शायरी हो या कविता या साहित्य हमेशा से ही सही और बौद्धिक विकास का निष्पक्ष रास्ता रहा है। बाहरी लोगों के बरगलाने में आकर अपने देश को ऐसी बातें , वो भी ऐसे कद्दावर लोग, जो पब्लिक आइकॉन हो वो लिखे तो लगता है कि बटवारा स्पष्ट दिखता की देश दुबारा विभाजन की ओर बढ़ रहा है।
मरहूम राहत इंदौरी मेरे पसंदीदा गीतकार रहे तूमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है गाने और भी है पर पॉइंट पर आते है इन्होंने अपने जीवन के आखरी सालो में ऐसा कुछ किया इनके नाम से जो मधुर गाने याद आते थे की बजाए अनाप शनाप निकलने लगा। एक मुशायरे में तकरीर की -
"सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है "~
गजब ट्रोल हुए बाप तक पहुँच गए?
इनकी मंशा सरल थी, हो सकता की हिन्दू मुसलमान सबका बराबर हक है कहना था, किन्तु-परन्तु ये मजहबों पर आईना कम डर से निकली उकसावे या धमकी ज्यादा लगी, मुसलमान कितना डर गया, पर डराया किसने? या ऐसी क्या हरकत की अब सदा शंका बनी रहे?
एक बात खुले तौर पर समझ ले पंडित-मैलवी-नेता तीनो मांगे दान-जकात-वोट, इसके लिए ये बरगलाते-डराते लड़ाई सब लगवाते है। किस पडले में जाना आप पर, हम तो सलाह चार्ज पर देते है।🤣🤣
बैक टू टॉपिक ट्रोल इस कदर की एक बेचैन मधुपुरी ने शेर में लिखे उनके सवाल का जवाब यूं दिया..... आप भी पढ़ें।
ख़फ़ा होते हैं तो हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैं,
सारे जहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं , इनका मान थोड़ी है !
ये कान्हा राम की धरती है, सजदा करना ही होगा,
मेरा वतन ये मेरी माँ है, लूट का सामान थोड़ी है !
मैं जानता हूँ, घर में बन चुके हैं सैकड़ों भेदी,
जो सिक्कों में बिक जाए वो मेरा ईमान थोड़ी है !
मेरे पुरखों ने सींचा है इस वतन को अपने लहू के कतरों से,
बहुत बांटा मगर अब बस, ख़ैरात थोड़ी है !
जो रहजन थे उन्हें हाकिम बना कर उम्र भर पूजा,
मगर अब हम भी सच्चाई से अनजान थोड़े हैं ?
बहुत लूटा फिरंगी ने कभी बाबर के पूतों ने,
ये मेरा घर है मेरी ज़ान, मुफ्त की सराय थोड़ी है!
कुछ तो अपने भी शामिल है वतन तोड़ने में,
अब ये कन्हैया और रविश मुसलमान थोड़ी है ।
नही शामिल है तुम्हारा खून इस मिट्टी में,
ये तुम्हारे बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है ।।
यकीनन किरायेदार ही मालुम पड़ते हैं ये इस मुल्क मे....
य़ू बेमुरव्वत अपना ही मकान कोई जलाता थोड़े ही है !
"सभी का खून शामिल था यहाँ की मिट्टी में, हम अनजान थोड़े हैं.!
किंतु जिनके अब्बा ले चुके पाकिस्तान, अब उनका हिंदुस्तान थोड़े है.!"
😊🙏🏻
नोट: आपत्तिजनक लगे तो, तो घोर अन्याय है हमारे साथ। मनोरंजन के पर्याय का दायरा बनाना वकाई में उचित नहीं, pk भगवान शंकर को सिगरेट पीते दिखा दे, और हम स्पेसिफिकली इंडीकेट ना कर पाए।