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*🙏ॐ श्रीगणेशाय नम:🙏*
*🎯आज की वाणी👉*
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*आरोप्यते शिला शैले*
*यत्नेन महता यथा ।*
*पात्यते तु क्षणेनाध -*
*स्तथात्मा गुणदोषयो:॥*
*भावार्थ👉*
_जिस तरह शिला को पर्वत के ऊपर महान यत्न से ले जाया जाता है और क्षण भर में सरलता से नीचे ढकेलना संभव है वैसे ही अपने गुण अथवा दोष से आत्मा का उत्थान अथवा पतन संभव है
