अवध, पूर्वांचल, मिथिला क्षेत्र और नेपाल के तराई क्षेत्र (विशेषकर जनकपुर अंचल) के गरीब से गरीब घर हो वहां भी लड़की की शादी में कोहबर बनाया जाता हैं . गांवमल की अनुभवी महिलाएं ही कोहबर घर क़ो तैयार करती हैं .
गोबर , हल्दी एवम pithar जिसे चावल क़ो भींगा कर बनाया जाता हैं से भी कोहबर बनाया जाता हैं
नैना जोगिन कां चित्र भी दीवाल पर बनाया जाता हैं .
यहाँ एक गौरी पूजन स्थल भी रहता हैं जो कि इस बात कां प्रतीक हैं कि मां गौरी की कृपा से अच्छे वर की प्राप्ति कन्या क़ो हुई हैं .
दीवाल पर बांस, कछुआ , तोता हाथी आदि के चित्र बनाए जाते हैं जो विभिन्न भावों के प्रतीक हैं .
दूल्हा दुलहिन से कोहबर की पूजा करवाई जाती हैं जिससे दोनों क़ो प्रेम आपस में सदा बना रहें .
कभी कभी कोहबर की दीवालों पर लिखा रहता हैं " अचल रहें अहीबात तुम्हारा "
दरसल शादी की सभी रस्में पूरी हो जाने के बाद एक कमरा जिसे लोग इसे सुहाग कक्ष भी कहते हैं बनाया जाता हैं .
इस कमरे में ही चार दिनों तक दूल्हा दुलहिन क़ो रखा जाता हैं .
चार दिनों के बाद पुनः संक्षिप्त रुप से सुबह के समय विवाह संस्कार होते हैं , सिंदूरदान भी होता हैं यानी के लड़की की मांग में दूल्हा द्वारा पुनः सिंदूर लगाया जाता हैं।
तब जाकर शादी पूर्ण रुप से संपन्न मानी जाती हैं और दूल्हा दुल्हन अपने से बड़ों के पैर छू कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं .
इसके बाद वे उस कमरे में ले जाऐं जाते हैं जहां विशेष रुप से सजाया हुआ कमरा रहता हैं .
इस विशेष रुप से सजाएं कमरे क़ो ही " कोहबर " कहते हैं .
हां एक बात मैं बताना भूल गया .ये चार दिन जी शादी के बाद होते हैं न उन चार दिनों जब तक चतुर्थी की रस्म सम्पन्न नही होती हैं दूल्हा और दुल्हन क़ो स्नान करना और एक दूसरे के शारीरिक संपर्क में आना वर्जित माना जाता हैं .
चार रातों के बाद जब चतुर्थी की रस्म सम्पन्न हो जाती हैं तो विवाह संपूर्ण माना जाता हैं और तब ही दूल्हा दुल्हन आगे शारीरिक संपर्क के लिए स्वतंत्र हैं .
वास्तव में दूल्हा दुल्हन के प्रथम मिलन से पूर्व इतनी पूजा करायी जाती हैं की उनमें सदा आपसी सद्भाव बना रहें और उच्च कोटि की संतान कां पदार्पण हो .
पर आजकल के जेट युग में परंपराओं कां निर्वहन कहां हो पाता हैं और बहुत से लोग इसे पिछड़ेपन की निशानी मानने लगे हैं और सभी कुछ फटाफट अंदाज में होने लगा हैं . इसलिए शादी भी फटाफट अंदाज में टूटने लगी हैं और तलाक के मामले दिनोदिन बढ़ते जा रहें हैं