- 🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक - 03 जून 2022*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)*
🌤️ *शक संवत -1944*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - ग्रीष्म ऋतु*
🌤️ *मास - ज्येष्ठ*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - चतुर्थी 04 जून रात्रि 02:41 तक तत्पश्चात पंचमी*
🌤️ *नक्षत्र - पुनर्वसु शाम 07:05 तक तत्पश्चात पुष्य*
🌤️ *योग - वृद्धि 04 जून रात्रि 03:34 तक तत्पश्चात ध्रुव*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 10:57 से दोपहर 12:37 तक*
🌞 *सूर्योदय - 05:57*
🌦️ *सूर्यास्त - 19:16*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी, उमा चतुर्थी (बंगाल ओड़िशा), गुरु अर्जुनदेवजी शहीदी दिवस*
🔥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *किसीको मिर्गी की तकलीफ हो तो* 🌷
➡ *किसीको मिर्गी की तकलीफ है तो २ चम्मच प्याज का रस पिलाकर ऊपर से आधा चम्मच भुना हुआ जीरा खिला दो | मिर्गी की बीमारी में ५ – १० दिन में लाभ होगा |*
🙏🏻 *लोककल्याणसेतु – अप्रैल- मई २०२० से*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *क्रोध आये तो* 🌷
😡 *क्रोध दूर करने का एक सरल प्रयोग भी है , जो पूज्य बापूजी सत्संग में बताते हैं :*
🤛🏻 *‘क्रोध आये तो मुट्ठियाँ बंद कर लो | दोनों हाथों की मुट्टियाँ ऐसे बंद करें कि नखों के दबाव से हथेलियाँ दबें | इससे क्रोध दूर होने में मदद मिलेगी |’*
🙏🏻 *स्त्रोत – ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१६ से*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷
🍽 *बर्तन*
*कई लोग घर में टूटे-फूटे बर्तन भी रखे रहते हैं जो कि अशुभ प्रभाव देते हैं। शास्त्रों के अनुसार घर में टूटे-फूटे बर्तन नहीं रखना चाहिए। यदि ऐसे बर्तन घर में रखे जाते हैं तो इससे महालक्ष्मी असप्रसन्न होती हैं और दरिद्रता का प्रवेश हमारे घर में हो सकता है। टूटे-फूटे और बेकार बर्तन घर में जगह भी घेरते हैं, इससे वास्तु दोष भी उत्पन्न होता है। वास्तु दोष उत्पन्न होने पर नकारात्मक फल मिलने लगते हैं।*
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌷 *भूत प्रेत मैली विद्या* 🌷
🌞 *रोज सुबह नहाकर सूर्य भगवान को जल देकर ही कुछ खाएं पियें।*
👉🏻 *४ बार गायत्री मंत्र बोल कर सूर्य को जल देनेवाले पर भूत प्रेत मैली विद्या असर नहीं करती।*
🙏🏻 *श्री सुरेशानंदजी, आदिलाबाद ९ जनवरी*
📖 *वैदिक पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*
📒 *वैदिक पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*
🕉️ *~ वैदिक पंचाग ~* 🕉️
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